राहों में कांटे अगर हो | Lyrics song
राहो में कांटे अगर हो
रुकना नहीं चलते जाना
यीशु तेरे साथ है
ये तूं विश्वास करना
संसार के अंत तक
वो तेरे साथ है
1. आंधी आने दो
या आने दो तूफ़ान
वो नैया क्या डूबेगी
जिस में है यीशु महान
2. दुःख से भरी है जिंदगी
मुशीबत भरे रास्ते है
दुःख दूर हो जायेंगे तेरे
गर तुं यीशु के साथ है
3. गर मौत का डर सताये तुझे
सूली पर तूं गौर कर
यीशु ने मौत को जीत लिया है
उस पर तूं विश्वास कर
4. राहो में कांटे अगर हो
रुकना नहीं चलते जाना
यीशु तेरे साथ है
ये तूं विश्वास करना
संसार के अंत तक
वो तेरे साथ है
गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)
यह गीत मसीही जीवन की यात्रा, उसमें आने वाली चुनौतियों और प्रभु यीशु मसीह की अटूट उपस्थिति और सामर्थ्य को दर्शाता है। जीवन की राहों में चाहे जितने भी दुःख, मुसीबतें, आंधियाँ या मृत्यु का भय क्यों न आए, एक विश्वासी को कभी रुकना नहीं है, क्योंकि यीशु मसीह ने संसार को जीत लिया है और वह युग के अंत तक हमारे साथ रहने का वादा करता है।
गीत के अंतरों का बाइबल वचनों के साथ स्पष्टीकरण
1. स्थाई और मुख्य संदेश: यीशु का साथ और अटूट विश्वास
गीत की मुख्य पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि चाहे रास्ते में कांटों जैसी मुश्किलें हों, हमें थमना नहीं है। प्रभु यीशु ने हमसे वादा किया है कि वह संसार के अंत तक हमारे साथ है।
- मत्ती 28:20“और देखो, मैं जगत के अन्त तक सर्वदा तुम्हारे साथ हूँ।”
- यशायाह 41:10“मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ, इधर-उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूँ; मैं तुझे दृढ़ करूँगा और तेरी सहायता करूँगा, और अपने धर्ममय दाहिने हाथ से तुझे सम्हाले रहूँगा।”
स्पष्टीकरण: जब हम इस संसार की कठिन राहों पर चलते हैं, तो परमेश्वर का यह वचन हमारे विश्वास को डगमगाने नहीं देता। यीशु का साथ होना ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
2. पहला अंतरा: आंधी और तूफ़ान में सुरक्षा
जब जीवन रूपी नाव में परीक्षाओं और मुसीबतों का तूफ़ान उठता है, तो जिस नाव के खेवनहार प्रभु यीशु हैं, वह नाव कभी डूब नहीं सकती।
- मरकुस 4:39“तब उसने उठकर हवा को डांटा, और पानी से कहा, ‘शान्त रह, थम जा!’ और हवा थम गई और बड़ा चैन हो गया।”
- भजन संहिता 107:29“वह आंधी को थमा देता है, और तरंगें शान्त हो जाती हैं।”
स्पष्टीकरण: चेले जब झील के तूफ़ान में डर गए थे, तब यीशु ने एक शब्द से आंधी को शांत कर दिया था। यह वचन हमें सिखाता है कि हमारे जीवन के बड़े से बड़े संकट भी यीशु के एक नाम से शांत हो जाते हैं।
3. दूसरा अंतरा: दुःख और मुसीबतों से छुटकारा
मसीही जीवन संघर्षों से मुक्त नहीं है, लेकिन उन संघर्षों में हमें अकेला नहीं छोड़ा गया है। यीशु हमारे दुखों को आनंद में बदलने की सामर्थ्य रखता है।
- यूहन्ना 16:33“मैंने ये बातें तुमसे इसलिये कही हैं कि तुम्हें मुझ में शान्ति मिले। संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु ढाढस बांधो, मैंने संसार को जीत लिया है।”
- भजन संहिता 34:19“धर्मी पर बहुत सी विपत्तियां पड़ती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से छुड़ाता है।”
स्पष्टीकरण: दुःख और मुसीबतें अस्थाई हैं। यदि हम यीशु के साथ बने रहते हैं, तो वह हमारी हर परिस्थिति को बदलने का सामर्थ्य रखता है और हमें अलौकिक शांति देता है।
4. तीसरा अंतरा: मृत्यु पर विजय और क्रूस पर ध्यान
जब मृत्यु या असफलता का भय हमें सताने लगे, तो हमें कलवरी के क्रूस (सूली) की ओर देखना चाहिए, जहाँ यीशु ने अपने प्राण देकर मृत्यु के डर को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
- 1 कुरुन्थियों 15:55-57“हे मृत्यु तेरी जय कहाँ रही? हे मृत्यु तेरा डंक कहाँ रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्त करता है।”
- इब्रानियों 2:14-15“इसलिए कि वह मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात् शैतान को निकम्मा कर दे; और उन्हें छुड़ा ले जो मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फंसे थे।”
- प्रकाशितवाक्य 1:18“मैं मर गया था, और देख, मैं युगानुयुग जीवित हूँ; और मृत्यु और अधोलोक की कुंजियां मेरे ही पास हैं।”
स्पष्टीकरण: यीशु मसीह केवल क्रूस पर मरा ही नहीं, बल्कि तीसरे दिन जी उठा। उसने मृत्यु पर विजय पा ली है। इसलिए, एक सच्चे विश्वासी के लिए मृत्यु अंत नहीं, बल्कि मसीह के साथ अनंत जीवन की शुरुआत है।


