कुर्बान Lyrics song
KURBAAN | Amit Kamble |
मेरे गुनाहों की सजा तूने ली यीशुआ
कैसे करूं अदा खुदा तेरा मैं शुक्रिया
कुर्बान हुआ, कुर्बान हुआ,
कुर्बान हुआ मेरे लिए
सब कुछ सहा, कुछ ना कहा,
बस चुप रहा मेरे लिए
कांटो का सर पे ताज, लहू बदन से बह रहा
कोड़ों की मार खा के, खुदा मेमना कुर्बान हु
कांटो का सर पे ताज, लहू बदन से बह रहा
कोड़ों की मार खा के, खुदा मेमना कुर्बान हुआ
कुर्बान हुआ, कुर्बान हुआ,
कुर्बान हुआ मेरे लिए
सब कुछ सहा, कुछ ना कहा,
बस चुप रहा मेरे लिए
कुर्बान हुआ, कुर्बान हुआ,
कुर्बान हुआ मेरे लिए
सब कुछ सहा, कुछ ना कहा,
बस चुप रहा मेरे लिए मेरे लिए
जिसे पाप नहीं पता, खुद पाप बन गया
मेरी मौत के बदले, खुद सूली चढ़ गया
जिसे पाप नहीं पता, खुद पाप बन गया
मेरी मौत के बदले, खुद सूली चढ़ गया
जिसे पाप नहीं पता, खुद पाप बन गया
मेरी मौत के बदले, खुद सूली चढ़ गया
पूरा हुआ पूरा हुआ पूरा हुआ
पूरा हुआ उसने कहा
पर्दा फटा आसरा मिटा
कुर्बान हुआ हे यशुआ
मेरे लिए मेरे लिए मेरे लिए
कुर्बान हुआ, कुर्बान हुआ,
कुर्बान हुआ मेरे लिए
सब कुछ सहा, कुछ ना कहा,
बस चुप रहा मेरे लिए
1. हमारे पापों का बोझ और उसका प्रतिफल
गीत की शुरुआत “मेरे गुनाहों की सजा तूने ली यीशुआ” से होती है। यह स्वीकारोक्ति है कि हम पापी थे और हमारी सजा मृत्यु थी।
- यशायाह 53:5: “परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।”
- स्पष्टीकरण: यह भविष्यवाणी यीशु के बलिदान के सैकड़ों साल पहले की गई थी। यह स्पष्ट करती है कि क्रूस पर जो घाव यीशु को मिले, वे वास्तव में हमारे पापों की सजा थे। उन्होंने हमारी शांति के लिए उस दर्द को सहा।
2. मसीह का मौन और सहनशीलता
गीत में बार-बार कहा गया है, “सब कुछ सहा, कुछ ना कहा, बस चुप रहा मेरे लिए।” यह यीशु की उस अधीनता को दर्शाता है जो उन्होंने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए दिखाई।
- यशायाह 53:7: “वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय और भेड़ अपनी ऊन कतरने वालों के सामने चुपचाप रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।”
- स्पष्टीकरण: यीशु के पास स्वर्गदूतों की सेना बुलाने की शक्ति थी, लेकिन उन्होंने विरोध नहीं किया। उन्होंने अपमान और पीड़ा को इसलिए चुपचाप सहा क्योंकि वे जानते थे कि उनके मौन रहने में ही हमारी मुक्ति छिपी है।
3. निष्पाप का पाप बन जाना
गीत की एक बहुत गहरी पंक्ति है, “जिसे पाप नहीं पता खुद पाप बन गया।” यह मसीह के प्रतिस्थापन (Substitution) के सिद्धांत को समझाती है।
- 2 कुरिन्थियों 5:21: “जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएं।”
- स्पष्टीकरण: यीशु पूरी तरह से पवित्र और निष्कलंक थे, लेकिन क्रूस पर परमेश्वर ने दुनिया भर के पापों को उन पर लाद दिया। उन्होंने ‘पाप’ बनकर हमारी मृत्यु को सहा, ताकि हम परमेश्वर की दृष्टि में ‘धर्मी’ बन सकें।
4. मृत्यु के बदले जीवन और सूली का दुख
“मेरी मौत के बदले खुद सूली चढ़ गया” — यह मसीह के प्रेम की पराकाष्ठा है। जहाँ हमें मरना था, वहाँ वे हमारे स्थान पर खड़े हो गए।
- रोमियों 5:8: “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।”
- स्पष्टीकरण: परमेश्वर ने हमारे सुधरने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जब हम अपने पापों में डूबे थे, तभी उन्होंने अपने पुत्र को हमारे लिए कुर्बान कर दिया। यह निस्वार्थ प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण है।
5. कांटों का ताज और शारीरिक पीड़ा
गीत में “कांटों का ताज” और “कोड़ों की मार” का उल्लेख है, जो मसीह के शारीरिक कष्टों को रेखांकित करता है।
- यूहन्ना 19:2-3: “और सिपाहियों ने कांटों का मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा, और उसे बैंजनी वस्त्र पहिनाया। और उसके पास आ-आकर कहने लगे, ‘हे यहूदियों के राजा, नमस्कार!’ और उसे थप्पड़ भी मारे।”
- स्पष्टीकरण: वह जो राजाओं का राजा है, उसने हमारे गौरव के लिए अपमान का मुकुट पहना। उनके शरीर से बहने वाला लहू हमारे हृदय को शुद्ध करने के लिए बहाया गया था।
6. धन्यवाद और कृतज्ञता
“कैसे करूं अदा खुदा तेरा मैं शुक्रिया” — यह गीत हमें परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ रहने के लिए प्रेरित करता है।
- भजन संहिता 116:12: “यहोवा ने मेरे जितने उपकार किए हैं, उनका बदला मैं उसे क्या दूँ?”
- स्पष्टीकरण: हम कभी भी यीशु के बलिदान का कर्ज नहीं चुका सकते। हमारा एकमात्र उत्तर यह हो सकता है कि हम अपना जीवन उन्हें सौंप दें और उनकी महिमा के लिए जिएं।

