कुर्बानी Lyrics song
QURBANI – Masihi Geet 2026 | Worshiper Saleem Inayat & Gulnaz Saleem |
कुर्बानी… येशू ने दी है कुर्बानी
कुर्बानी… येशू ने दी है कुर्बानी
गुनाहों को और खताओं को,
मिटाने को दी है कुर्बानी
कुर्बानी… येशू ने दी है कुर्बानी
आसान नहीं था जान अपनी देना,
सूली पे चढ़ना, कीलों को सेहेना
सूली पें कर दी है पेश येशू ने
अपनी ही जान की कुर्बानी
कुर्बानी… येशू ने दी है कुर्बानी
अज्ल से जो था बर्रा खुदा का,
वो ही हमारा इबजी हुआ था
अपने लहू से कीमत अदा की,
सूली पे देके कुर्बानी
कुर्बानी… येशू ने दी है कुर्बान
सूली पे उसने फिदीया दिया था,
काम-ए-इलाही को पूरा किया था
बाप से रिश्ता बहाल किया है,
सूली पे देके कुर्बानी
कुर्बानी… येशू ने दी है कुर्बानी
“तमाम हुआ” और यह कहकर येशू मसीह ने सलीब पर अपनी जान दे दी।
चट्टानें तिर्की, एहकल का पर्दा दो हिस्से हो गया
और रोमी सिपाही यह कहने पर मजबूर हो गए कि वाकई ही यह खुदा का बेटा है।
कुर्बानी… येशू ने दी है कुर्बानी
गीत का सारांश और आत्मिक स्पष्टीकरण
यह गीत हमें कलवरी के क्रूस की याद दिलाता है, जहाँ प्रेम और न्याय का मिलन हुआ। यह गीत स्पष्ट करता है कि यीशु का बलिदान कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि परमेश्वर की उद्धार की योजना का मुख्य हिस्सा था।
1. पापों का प्रायश्चित (Atonement for Sins): गीत की पंक्तियाँ “गुनाहों को और खताओं को मिटाने को दी है कुर्बानी” [01:08] मसीही विश्वास के आधार को दर्शाती हैं। इब्रानियों 9:22 के अनुसार, “बिना लोहू बहाए क्षमा नहीं होती।” हमारे पापों की कीमत इतनी बड़ी थी कि कोई मनुष्य उसे चुका नहीं सकता था, इसलिए निष्कलंक यीशु ने अपनी जान देकर हमारे पापों को मिटा दिया।
2. दुःख और पीड़ा को सहना (Suffering on the Cross): “आसान नहीं था जान अपनी देना, सूली पे चढ़ना, कीलों को सहना” [01:53] यह शब्द उस शारीरिक और मानसिक वेदना को बताते हैं जो प्रभु ने सही। यशायाह 53:5 कहता है, “वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया।” उन्होंने हमारे बदले वह दंड सहा जो हमें मिलना चाहिए था।
3. खुदा का बर्रा (The Lamb of God): गीत में यीशु को “खुदा का बर्रा” (Lamb of God) कहा गया है [03:14]। यह यूहन्ना 1:29 की याद दिलाता है जहाँ यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने कहा था, “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत का पाप उठा ले जाता है।” पुराने नियम में पापों के लिए पशुओं की बलि दी जाती थी, लेकिन यीशु ने एक ही बार में स्वयं को बलिदान कर हमेशा के लिए उद्धार का मार्ग खोल दिया।
4. परमेश्वर से मेल-मिलाप (Reconciliation with the Father): “बाप से रिश्ता बहाल किया है, सूली पे देके कुर्बानी” [05:13]। आदम के पाप के कारण मनुष्य और परमेश्वर के बीच जो दूरी आ गई थी, उसे यीशु के बलिदान ने समाप्त कर दिया। 2 कुरिन्थियों 5:19 के अनुसार, “परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ जगत का मेल-मिलाप कर लिया।” अब हम बेझिझक पिता परमेश्वर के पास जा सकते हैं।
5. कार्य की पूर्णता (It is Finished): गीत के अंत में उल्लेख है कि यीशु ने कहा “तमाम हुआ” (It is Finished) [05:44]। इसका अर्थ है कि उद्धार का कार्य पूरा हो गया। यूहन्ना 19:30 में यह अंतिम शब्द घोषित करते हैं कि अब पाप और मृत्यु पर विजय प्राप्त हो चुकी है।

