Yeshu Haikal Nu Saaf Karda Lyeics

Yeshu Haikal Nu Saaf Karda Lyeics
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येशु हैकल नु साफ करदा Lyrics song

Yeshu Haikal Nu Saaf Karda Lyeics

रस्सी दा बना के कोड़ा, येशु हैकल नु साफ करदा
बे-इंसाफ दे तईं, इंसाफ करदा
रस्सी दा बना के कोड़ा, येशु हैकल नु साफ करदा

जिथे वारदां लाशां पाई हैं, लाशां पाई हैं
लोगां ने बनाई जिथे दुकान है
येशु किसे नु नहीं माफ़ करदा
रस्सी दा बना के कोड़ा, येशु हैकल नु साफ करदा

करीं तूं दूर गंदगी, दूर तू गंदगी
जिथे होनी चाहिदी रोज बंदगी, रोज बंदगी
नाश जो करे, येशु उसदा विनाश करदा
रस्सी दा बना के कोड़ा, येशु हैकल नु साफ करदा

सेवादार बोले जदों, गुस्सा जे करदे
ना रब तों डरदे, ना बाइबल तों डरदे
बंदा रखिया काम सारे येशु आप करदा
रस्सी दा बना के कोड़ा, येशु हैकल नु साफ करदा

अल्फा ते ओमेगा जो है
येशु जीना, येशु मरना, येशु नहीं मारना
बच्चे-बच्चे दा बेड़ा पार करदा
रस्सी दा बना के कोड़ा, येशु हैकल नु साफ करदा

गीत का आध्यात्मिक सारांश और बाइबिल वचनों का स्पष्टीकरण

यह गीत बाइबिल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना पर आधारित है, जब प्रभु यीशु मसीह ने यरूशलेम के मंदिर (हैकल) में प्रवेश किया और उसे अशुद्ध करने वालों को बाहर निकाला। यह गीत हमें चेतावनी देता है कि परमेश्वर का घर प्रार्थना का घर है, न कि व्यापार या गंदगी का। साथ ही, यह हमारे शरीर रूपी मंदिर की शुद्धि की ओर भी संकेत करता है।

1. मंदिर की शुद्धि और प्रभु का अधिकार

गीत की मुख्य पंक्ति है, “रस्सी दा बना के कोड़ा, यीशु हैकल नु साफ़ करदा।” यह प्रभु यीशु के उस धार्मिक क्रोध और अधिकार को दर्शाता है जो उन्होंने मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए दिखाया। बाइबिल वचन:

“और उसने रस्सियों का कोड़ा बना कर, उन सब को और भेड़ों और बैलों को भी मन्दिर से निकाल दिया, और सर्राफों के पैसे बिखेर दिए, और पीढ़ों को उलट दिया।” (यूहन्ना 2:15)

स्पष्टीकरण: प्रभु यीशु ने जब देखा कि मंदिर में परमेश्वर की आराधना के बजाय स्वार्थ और व्यापार हो रहा है, तो उन्होंने स्वयं उसे साफ किया। यह हमें सिखाता है कि परमेश्वर अपने पवित्र स्थान में किसी भी प्रकार की अशुद्धता या बेइंसाफी बर्दाश्त नहीं करता।

2. प्रार्थना का घर बनाम व्यापार की जगह

गीत में उल्लेख है कि लोगों ने जिसे प्रार्थना का स्थान होना चाहिए था, उसे दुकान बना दिया। प्रभु ने इस पाखंड को समाप्त कर सच्चा इंसाफ किया। बाइबिल वचन:

“और उन से कहा, लिखा है, ‘मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा’; परन्तु तुम उसे ‘डाकुओं की खोह’ बनाते हो।” (मत्ती 21:13)

स्पष्टीकरण: मंदिर का मुख्य उद्देश्य परमेश्वर से मेल-मिलाप और प्रार्थना था। जब लोग धर्म के नाम पर अपना लाभ खोजने लगते हैं, तो वह स्थान परमेश्वर की उपस्थिति खो देता है। यीशु आज भी हमारे जीवन और कलीसियाओं से ऐसी ‘दुकानदारी’ को साफ करना चाहते हैं।

3. शरीर: परमेश्वर का मंदिर

गीत में गंदगी को दूर करने और रोज बंदगी (आराधना) करने पर जोर दिया गया है। आत्मिक अर्थों में, हमारा शरीर ही वह मंदिर है जहाँ पवित्र आत्मा वास करता है। बाइबिल वचन:

“क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो?” (1 कुरिन्थियों 6:19)

स्पष्टीकरण: जैसे यीशु ने पत्थर के मंदिर को साफ किया, वैसे ही वह चाहते हैं कि हमारा जीवन भी पाप और अशुद्धता से मुक्त रहे। यदि हम अपने शरीर रूपी मंदिर को नाश करेंगे, तो परमेश्वर का न्याय हम पर होगा। इसलिए, हमें निरंतर आत्मिक शुद्धि की आवश्यकता है।

4. परमेश्वर का डर और वचनों की अवहेलना

गीत चेतावनी देता है कि जो सेवादार या लोग प्रभु से नहीं डरते और बाइबिल के वचनों का सम्मान नहीं करते, उनका न्याय निश्चित है। बाइबिल वचन:

“परमेश्वर का भय मानना बुद्धि का मूल है, और परम प्रधान को जानना ही समझ है।” (नीतिवचन 9:10)

स्पष्टीकरण: जब हम परमेश्वर के घर में सेवा करते हैं, तो हमारे भीतर उसके प्रति भय और आदर होना चाहिए। जो लोग केवल दिखावे की भक्ति करते हैं और जिनके मन में परमेश्वर का डर नहीं है, प्रभु उनके कार्यों का हिसाब स्वयं करेंगे।

5. क्षमा और न्याय का अधिकार

गीत कहता है कि यीशु किसी को माफ नहीं करेगा जो मंदिर को अशुद्ध करता है, लेकिन बच्चों और शुद्ध मन वालों के लिए वह ‘बाप’ (पिता) के समान दयालु है। बाइबिल वचन:

“यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो।” (1 कुरिन्थियों 3:17)

स्पष्टीकरण: परमेश्वर दयालु है, लेकिन वह पवित्र भी है। वह हमारे पापों को क्षमा करता है जब हम पश्चाताप करते हैं, लेकिन यदि हम जानबूझकर उसके नाम और उसके मंदिर का अपमान करते हैं, तो हमें उसके न्याय का सामना करना पड़ता है।

निष्कर्ष

यह गीत हमें आत्म-मंथन की प्रेरणा देता है। क्या हमने भी अपने दिल के मंदिर को सांसारिक चिंताओं, लालच और पाप की ‘दुकान’ बना दिया है? प्रभु यीशु आज भी अपने वचन के कोड़े से हमारे जीवनों को साफ करना चाहते हैं ताकि हम सच्चे मन से उसकी ‘बंदगी’ (आराधना) कर सकें। वह चाहता है कि हम बेइंसाफी छोड़कर उसके सच्चे इंसाफ में चलें।


बाइबिल का संदेश: “अत: हे प्रियों, जब कि ये प्रतिज्ञाएं हमें मिली हैं, तो आओ, हम अपने आप को शरीर और आत्मा की सब मलिनता से शुद्ध करें, और परमेश्वर का भय रखते हुए पवित्रता को सिद्ध करें।” (2 कुरिन्थियों 7:1)

Yeshu Haikal Nu Saaf Karda Lyeics in hindi

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