मैं पुकारदा हाँ Lyrics song
Mai pukarda haan Lyrics
मैं पुकारदा हां, येसु उत्तर देंदा ऐ
मेरे सारे रोगां नूं ओह दूर कर देंदा ऐ
मैं पुकारदा हां…….
1. येसु मेरे शाफ़ी दूर कीतियां बीमारियां
ओहदे नाम विच्च दूर होईयां ने लाचारीयां
साडी ऐ रिहाई जो मसह ओहदा वेहंदा ऐ
मैं पुकारदा हां…….
2. छड्डे न ओह कल्ला मेरे नाल नाल रेहंदा ऐ
बरकतां दा मींह मेरे सिर उत्ते पैंदा ऐ
आपणे खंभा दे नाल मैनूं ढक लैंदा ऐ
मैं पुकारदा हां……..
3. हिरणी दे वांगू मेरे पैर बनाउंदा ऐ
आपणी राहां दे उत्ते चलणा सिखाउंदा ऐ
डिगण न देवे ओह मैनूं सांभ लैंदा ऐ
मैं पुकारदा हां……..
4. पाप तो मैं मेरा येसु ही बचाउंदा ऐ
आपणा वचन मेरे दिल विच्च पाउंदा ऐ
आपणे फलां दे नाल मैनूं भर देंदा ऐ
मैं पुकारदा हां………
5. मेरे सब सोचां ते ख्यालां नूं ओह जाणदा
किवें मैं चुकावां येसु मुल तेरे प्यार दा
मेरे सारे रोगां नूं ओह दूर कर देंदा ऐ
मैं पुकारदा हां………
6. दुःखी ते बिमारां दा सहारा येसु नासरी
डुब्बदे होयां दा किनारा येसु नासरी
डुब्बण न देवे जेहदी बांह फड़ लैंदा ऐ
मैं पुकारदा हां……….
आध्यात्मिक सारांश: तेरी रूह का काम है
यह भजन मुख्य रूप से पवित्र आत्मा की उस अलौकिक शक्ति पर केंद्रित है जो मनुष्य के जीवन में असंभव को संभव बनाती है। गीत का सार यह है कि मसीही जीवन में जो कुछ भी सार्थक और परिवर्तनकारी घटित होता है, वह मनुष्य की अपनी बुद्धि या बल से नहीं, बल्कि केवल परमेश्वर की ‘रूह’ (आत्मा) के द्वारा ही संभव है।
गीत के बोल हमें याद दिलाते हैं कि पवित्र आत्मा ही वह शक्ति है जो टूटे हुए हृदयों को जोड़ती है, बीमारियों से शिफा (चंगाई) देती है और पाप के बंधनों को तोड़ती है। इस भजन में आत्मा को एक ‘सहायक’, ‘सांत्वना देने वाला’ और ‘मार्गदर्शक’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जब एक विश्वासी पवित्र आत्मा के लिए अपना हृदय खोलता है, तो उसके जीवन में नयापन आता है और वह परमेश्वर की महिमा को अपने कार्यों में देखने लगता है। यह गीत एक समर्पण है कि हम अपनी ताकत पर नहीं, बल्कि पूरी तरह से पवित्र आत्मा की सामर्थ्य पर निर्भर हैं।
गीत से जुड़े प्रमुख बाइबल वचन और स्पष्टीकरण
इस गीत के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए पवित्र शास्त्र के इन वचनों को ध्यानपूर्वक पढ़ें:
1. न बल से, न शक्ति से, परन्तु आत्मा द्वारा: यह वचन इस पूरे गीत की नींव है। यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के राज्य का कोई भी कार्य मानवीय शक्ति से नहीं हो सकता।
“उसने मुझ से कहा, ‘यहोवा का वचन जरुब्बाबेल के लिये यह है: न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।'” (जकर्याह 4:6)
2. पवित्र आत्मा: हमारा सहायक और परामर्शदाता: गीत में आत्मा की उपस्थिति की जो पुकार है, वह यीशु के उस वादे पर आधारित है जहाँ उन्होंने हमें अकेला न छोड़ने की बात कही थी।
“और मैं पिता से विनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।” (यूहन्ना 14:16)
3. सामर्थ्य और गवाही: गीत आत्मा के काम को सामर्थ्य के रूप में दर्शाता है। बाइबल सिखाती है कि आत्मा के आने पर ही हम सामर्थ्य पाते हैं।
“परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।” (प्रेरितों के काम 1:8)
4. पवित्र आत्मा द्वारा चंगाई और छुटकारा: जहाँ प्रभु का आत्मा है, वहाँ स्वतंत्रता है। गीत में बंधनों के टूटने का जिक्र इसी सत्य की ओर संकेत करता है।
“प्रभु तो आत्मा है; और जहां कहीं प्रभु का आत्मा है, वहां स्वतन्त्रता है।” (2 कुरिन्थियों 3:17)
5. टूटे हुओं को दिलासा देना: पवित्र आत्मा का एक मुख्य कार्य शोक करने वालों को शांति देना और टूटे हुए मन वालों को चंगा करना है।
“प्रभु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है; और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूं, और बन्दियों के लिये छुटकारे का और कैदियों के लिये छुड़ौते का प्रचार करूं।” (यशायाह 61:1)
6. आत्मा के फल और जीवन में परिवर्तन: जब आत्मा काम करती है, तो मनुष्य के स्वभाव में बदलाव आता है।
“पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।” (गलातियों 5:22-23)
7. सत्य की ओर मार्गदर्शन: गीत में ‘वचन की समझ’ की जो बात है, वह पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन से ही आती है।
“परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आने वाली बातें तुम्हें बताएगा।” (यूहन्ना 16:13)
निष्कर्ष
“तेरी रूह का काम है” एक ऐसा भजन है जो हमें अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर परमेश्वर की असीमित सामर्थ्य को देखने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह हमें सिखाता है कि बिना पवित्र आत्मा के हमारा आत्मिक जीवन सूखा और निष्प्राण है। जब हम पवित्र आत्मा को अपने जीवन का संचालन करने देते हैं, तो वह हमारे दुखों को आनंद में और हमारी कमजोरियों को सामर्थ्य में बदल देता है। यह गीत हर उस विश्वासी के लिए एक प्रार्थना है जो अपने जीवन में परमेश्वर के अभिषेक और उनके स्पर्श की गहराई को महसूस करना चाहता है।
