लवागा नाम ओहदा ना मैं शरमावागा Lyrics song
लवागा नाम ओहदा,
ना मैं शरमावागा,
जिन्ने ज़िन्दगी दित्ती ए,
ओहदे गुण गावांगा
लवागा नाम ओहदा….
1. येशु नाम हैं ज़िन्दगी दा,
जिन्ने मैंनू आण बचाया ए,
आपना हत्थ वधां के मैंनू,
पापां चो कड्डू लै आया ए,
नाल मेरे येशु, ना मैं घबरावागा,
जिन्ने ज़िन्दगी दत्ती ए…
2. मेरा सब कुछ ओह ही हैं हुण,
ओहदा बण के रहणा हैं,
हर साह ना हुण हर वेले मैं,
येशु – येशु कहणा ए,
मैं येशु तो बिना कुछ ना चाहवागा,
जिन्ने ज़िन्दगी दित्ती ए…
3. आजा बन्देया उस दे दर जिस,
नाम तो सब कुछ मिलदा ए,
येशु तो कुछ लुकेया ना ओह,
हाल जाणदा दिल दा ए,
मैं नासरी नाल कि दूर ना जावागा,
जिन्ने ज़िन्दगी दित्ती ए..
यह बेहद खूबसूरत और गवाही से भरा पंजाबी मसीही गीत “लवागा नाम ओहदा, ना मैं शरमावागा (जिन्ने ज़िन्दगी दित्ती ए)” एक विश्वासी के दृढ़ निश्चय, मसीह के प्रति अटूट प्रेम और सुसमाचार के प्रति बिना किसी झिझक के खड़े रहने के जज्बे को बयां करता है। यहाँ इस गीत का शुद्ध आत्मिक सारांश और उससे जुड़े पवित्र बाइबल के पूरे वचन देवनागरी लिपि में दिए गए हैं, जिसे आप अपनी पोस्ट के नीचे विवरण के रूप में उपयोग कर सकते हैं:
गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचन का स्पष्टीकरण
यह गीत इस बात की ज़ोरदार घोषणा करता है कि प्रभु यीशु मसीह ही जीवन के वास्तविक दाता हैं। एक मसीही विश्वासी बिना किसी डर या लोक-लाज के, पूरे गौरव के साथ अपने प्रभु के नाम को स्वीकार करता है। गीत का केंद्रीय विषय यह है कि जब मसीह हमें पाप के गहरे दलदल से बाहर निकालते हैं, तो हमारा पूरा अस्तित्व उनकी स्तुति और उनके प्रति पूर्ण समर्पण के लिए समर्पित हो जाता है।
नीचे गीत के मुख्य आत्मिक विचारों के साथ सटीक और पूरे बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. सुसमाचार और मसीह के नाम में निडरता
“लवागा नाम ओहदा, ना मैं शरमावागा, जिन्ने ज़िन्दगी दित्ती ए, ओहदे गुण गावांगा…”
स्पष्टीकरण: गीत का मुख्य भाग (स्थाई) प्रेरित पौलुस के उस विश्वास को झलकाता है जहाँ वह सुसमाचार से न शर्माने की बात करते हैं। जिस प्रभु ने हमें अनंत काल का जीवन दिया है, उसका नाम लेने में और संसार के सामने उसके गुणों का गान करने में एक विश्वासी को कोई संकोच या शर्म नहीं होनी चाहिए। यह मसीह के प्रति हमारी सार्वजनिक गवाही को दर्शाता है।
संबंधित पूरे बाइबल वचन:
- रोमियों 1:16 – “क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं शर्माता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ्य है; पहले यहूदी के लिये, फिर यूनानी के लिये।”
- लुका 9:26 – “क्योंकि जो कोई मुझ से और मेरी बातों से शर्माएगा, मनुष्य का पुत्र भी जब अपनी और अपने पिता की और पवित्र दूतों की महिमा के साथ आएगा, तो उससे शर्माएगा।”
- भजन संहिता 105:1 – “यहोवा का धन्यवाद करो, उससे प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो!”
2. पाप के दलदल से उद्धार और मसीह की उपस्थिति का ढाढस
“येशु नाम हैं ज़िन्दगी दा, जिन्ने मैंनू आण बचाया ए, आपना हत्थ वधां के मैंनू, पापां चो कड्डू लै आया ए, नाल मेरे येशु, ना मैं घबरावागा…”
स्पष्टीकरण: यह भाग मानव जाति के उद्धार की कहानी है। हम सब अपने पापों और अपराधों के कारण आत्मिक मृत्यु की दशा में थे। ऐसी लाचार अवस्था में प्रभु यीशु मसीह ने अनुग्रह का हाथ बढ़ाकर हमें पापों के बंधनों से बाहर निकाला। जब वह उद्धारकर्ता हमारे जीवन में आ जाता है और हमारे अंग-संग रहता है, तो संसार की कोई भी परेशानी या विपत्ति हमें डरा या घबरा नहीं सकती।
संबंधित पूरे बाइबल वचन:
- भजन संहिता 40:2 – “उसने मुझे सत्यानाश के गड्ढे and दलदल की कीच में से उबारा, और मेरे पांवों को चट्टान पर खड़ा करके मेरे पैरों को स्थिर किया।”
- मत्ती 1:21 – “वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।”
- यशायाह 41:10 – “मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ, इधर-उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूँ; मैं तुझे दृढ़ करूँगा और तेरी सहायता करूँगा, और अपने धर्ममय दाहिने हाथ से तुझे सम्हाले रहूँगा।”
3. हर सांस से मसीह की आराधना और अनन्य प्रेम
“मेरा सब कुछ ओह ही हैं हुण, ओहदा बण के रहणा हैं, हर साह ना हुण हर वेले मैं, येशु – येशु कहणा ए, मैं येशु तो बिना कुछ ना चाहवागा…”
स्पष्टीकरण: यहाँ विश्वासी का प्रभु के प्रति एक गहरा और अनन्य प्रेम (Exclusive Love) प्रकट होता है। मसीह को पा लेने के बाद संसार की धन-दौलत और अभिलाषाएँ फीकी पड़ जाती हैं। विश्वासी का उठना-बैठना और उसकी हर एक सांस केवल यीशु के नाम के इर्द-गिर्द घूमती है। वह मसीह के अलावा इस संसार में किसी अन्य वस्तु की चाह नहीं रखता, क्योंकि यीशु ही उसका सर्वस्व बन चुका है।
संबंधित पूरे बाइबल वचन:
- भजन संहिता 73:25 – “स्वर्ग में मेरा कौन है? और पृथ्वी पर तेरे सिवा मैं और किसी को नहीं चाहता।”
- फिलिप्पियों 1:21 – “क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।”
- प्रेरितों के काम 17:28 – “क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर हैं; जैसा तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, ‘हम तो उसी के वंश भी हैं’।”
4. अंतर्यामी प्रभु और उसके नाम की सर्व-सामर्थ्य
“आजा बन्देया उस दे दर जिस नाम तो सब कुछ मिलदा ए, येशु तो कुछ luकेया ना ओह हाल जाणदा दिल दा ए, मैं नासरी नाल कि दूर ना जावागा…”
स्पष्टीकरण: अंतिम अंतरे में पूरी मानवता को प्रभु यीशु मसीह के खोजी होने का न्योता दिया गया है। यीशु का नाम वह सर्वोच्च नाम है जिसके पास हर एक आत्मिक और सांसारिक आशीष मौजूद है। हमारा प्रभु अंतर्यामी है; उससे हमारे दिल की कोई भी बात, कोई भी घाव या विचार छिपा नहीं है। वह हमारे दुखों को गहराई से समझता है। इसलिए भक्त यह निर्णय लेता है कि वह उस नासरी (यीशु) से कभी दूर नहीं भटकेगा।
संबंधित पूरे बाइबल वचन:
- यूहन्ना 16:24 – “अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगा; मांगो तो पाओगे ताकि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।”
- 1 इतिहास 28:9 – “…क्योंकि यहोवा सारे हृदयों को जांचता और विचारों की सब युक्तियों को समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे, तो वह तुझ को सदा के लिये छोड़ देगा।”
- इब्रानियों 4:13 – “और सृष्टि की कोई वस्तु उससे छिपी नहीं है वरन जिससे हमें काम है, उसकी आँखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपर्दा हैं।”
- यूहन्ना 15:5 – “मैं दाखलता हूँ, तुम डालियाँ हो; जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वही बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।”
निष्कर्ष: यह संपूर्ण गीत एक मसीही जीवन का सच्चा संकल्प है। यह हमें याद दिलाता है कि जिस प्रभु ने अपना हाथ बढ़ाकर हमें पाप से छुड़ाया और एक नया जीवन दिया, उसके नाम की गवाही देने में हमें कभी लज्जित नहीं होना चाहिए। वह हमारे दिल के हाल को जानता है और जब हम अपनी हर सांस से उसे पुकारते हैं और उससे जुड़े रहते हैं, तो वह हमें एक निडर और फलवंत जीवन प्रदान करता है।
