आओ मिल के खुदा दा धनवाद करिए Lyrics song
येसु दिया रहमतां नू याद करिए
आओ मिल के खुदा दा
धनवाद करिए
येसु दिया रहमता…..
1. पुत्तर ते धिया दी दात जिन्ने दित्ती ए
हीरेयां तो कीमती सौगात जिन्ने दित्ती ए
चरणां च ओहदे, फरियाद करिए
आओ मिल के …..
2. साडेया गुनाहां लई दित्ता बलिदान ए
राजेया दा राजा प्रभु बडा ही महान ए
गमां विच्चो ज़िन्दगी, आज़ाद करिए
आओ मिल के……
3. दित्ता ना सहारा जदों किसे इंसान ने
मेरे ते रहम कीता शाफ़ी रहमान ने
लै के ओहदा नाम, दिलशाद करिए
आओ मिल के …..
गीत का मुख्य सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह गीत पूरी तरह से परमेश्वर की स्तुति, उसके धन्यवाद और उसकी असीम करुणा (रहमत) पर आधारित है। गीतकार हमें याद दिलाता है कि जब हम परमेश्वर के उपकारों को याद करते हैं, तो हमारा हृदय धन्यवाद से भर जाता है। आइए इस गीत के तीन अंतरो (Paragraphs) को बाइबल के जीवित वचनों के प्रकाश में गहराई से समझते हैं:
1. परमेश्वर का धन्यवाद और उसकी करुणा (स्थाई भाव)
गीत की शुरुआत ही हमें परमेश्वर की संगति में आकर उसका धन्यवाद करने का निमंत्रण देती है। प्रभु यीशु मसीह ने हमारे जीवन पर जो अनगिनत रहमतें (अनुग्रह) की हैं, वे हमारे जीवन का आधार हैं।
भजन संहिता 103:2 “हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।”
स्पष्टीकरण: यह वचन गीत की मुख्य पंक्ति से सीधे जुड़ता है। जब हम यीशु की रहमतों को याद करते हैं, तो हमारा आत्मिक जीवन मज़बूत होता है। परमेश्वर का धन्यवाद करना केवल एक रीत नहीं, बल्कि विश्वासी के जीवन का स्वभाव होना चाहिए।
2. संतान: परमेश्वर की अनमोल सौगात (पहला अंतरा)
गीत का पहला भाग बताता है कि हमारे बेटे और बेटियाँ (पुत्तर ते धिया) किसी सांसारिक धन-दौलत से नहीं, बल्कि परमेश्वर की ओर से मिले हीरे से भी कीमती उपहार हैं। इसलिए हमें अपने परिवारों को उसके चरणों में सौंपकर प्रार्थना (फरियाद) करनी चाहिए।
भजन संहिता 127:3 “देखो, लड़के यहोवा के दिए हुए भाग हैं, और गर्भ का फल उसकी ओर से प्रतिफल है।”
स्पष्टीकरण: बाइबल स्पष्ट करती है कि संतान मनुष्य की अपनी सामर्थ्य से नहीं, बल्कि यहोवा की आशीष से मिलती है। वे परमेश्वर की अमानत हैं। जब हम गीत के अनुसार उनके लिए प्रभु के ‘चरणां च फरियाद’ (प्रार्थना) करते हैं, तो हम अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करते हैं।
3. पापों से मुक्ति और यीशु का बलिदान (दूसरा अंतरा)
दूसरा अंतरा मसीही विश्वास के सबसे बड़े सत्य को प्रकट करता है—यीशु मसीह का क्रूस पर बलिदान। वह राजाओं का राजा है, फिर भी उसने हमारे पापों (गुनाहां) के लिए खुद को सौंप दिया ताकि हम दुखों और पाप के बंधनों (गमां विच्चो) से आज़ाद हो सकें।
रोमियों 5:8 “परन्तु परमेश्वर हमारे प्रति अपने प्रेम की भलाई इस प्रकार प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।”
मत्ती 20:28 “जैसे कि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपने प्राण दे।”
स्पष्टीकरण: इन वचनों से साफ है कि प्रभु यीशु का बलिदान हमारी योग्यता के कारण नहीं, बल्कि उसके महान प्रेम के कारण था। उसने क्रूस पर लहू बहाकर हमें शैतान और पाप की गुलामी से आज़ाद किया, ताकि हमारी ज़िन्दगी आज़ाद और आनंदित हो सके।
4. संकट में एकमात्र सहारा और चंगाई (तीसरा अंतरा)
जब संसार के लोग, मित्र या रिश्तेदार (इंसान) हमारा साथ छोड़ देते हैं, तब केवल सच्चा परमेश्वर हमारा सहारा बनता है। वह ‘शाफ़ी’ (चंगाई देने वाला) और ‘रहमान’ (दयालु) है, जो हमारे टूटे दिलों को खुशी (दिलशाद) से भर देता है।
भजन संहिता 27:10 “मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भालेगा।”
यशायाह 53:5 “परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।”
स्पष्टीकरण: जब कोई इंसान काम नहीं आता, तब खुदा का रहम काम आता है। यशायाह का वचन प्रमाणित करता है कि यीशु हमारा ‘शाफ़ी’ (चंगाई दाता) है। शारीरिक बीमारी हो या मानसिक दुःख, उसका पवित्र नाम लेते ही हमारा दिल आनंदित और आज़ाद हो जाता है।
निष्कर्ष
यह गीत महज़ एक भजन नहीं, बल्कि बाइबल के सत्यों का एक सुंदर निचोड़ है। यह हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, हमें राजाओं के राजा, जीवित प्रभु यीशु मसीह की आराधना करनी चाहिए क्योंकि वही हमारा सृष्टिकर्ता, मुक्तिदाता और चंगाई देने वाला खुदा है। आइए, हम सब मिलकर उसकी रहमतों को याद करें और उसका धन्यवाद करें। आमिन!



